Mama ki dil cheer dene wali love story

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    dil cheer dene wali love story

    ye article Writer- Rajendra Se Sabhar Prapt kia gaya hai.

     

    dil cheer dene wali love story unhi ke shabdon me—जब मैं आठवीं में पढ़ता था तो एक लड़की को मुझ से इश्क हो गया। एक दिन उसने बोला कि सुबह खेत में मिलना, मैं तो 8 बजे ही उनके खेत में जाकर बैठ गया।उनके खेत में से आवारा जानवर को भगाता रहा।भाग भागकर बुरा हाल हो गया पर वो 3 बजे तक नहीं आई।

    तो गांव में आया तो पता चला कि वो तो 9 वाली बस से मामा के गई। मैंने ये सोच कर सब्र कर लिया कि इश्क में हीर ने राझें से 12-13 साल भैंसे चरवाई थी तो ये तो एक दिन की ही बात है। भूखा प्यासा घर पहुंचा तो मां ने चप्पलों से पीटा।

    कुछ दिन बाद उधर से निकला तो देखा कि मेरा एक दोस्त भाग भागकर उनके खेत से जानवर निकाल रहा है। मैंने पूछा कि तू क्यूं भाग रहा है तो बोला कि बस ऐसे ही। मैंने माचिस की डिब्बी में रखी आधी बीङी निकालकर सुलगाई और दो बङे कश खींचकर धागे तक लगाकर उसको दी।

    दोस्त का प्यार देखकर पिघल गया और बताया कि उसको भी मिलने के लिए बुलाया था।तब समझ में आया कि जिस दिन उनके कोई रखवाली करने वाला ना हो उस दिन हम जैसों को खेत में बुलाती हैं। पहली बार चूतिया कटने का एहसास अंदर तक पसर गया।

    फिर मैं भी मौका तकने लगा,एक दिन बिटौङे में अकेले गोबर पाथते हुए दिख गई।धीरे से पीछे जाकर दोनों हाथों की दोहात्थङ उसकी पीठ पर ठोकी,तीसरी ने उधर गोबर में ही पसार दी। और उसका गोबर में मुंह टिकते ही मेरा पहला विधिवत ब्रेकअप हो गया। मुझे बहुत दर्द हुआ , ब्रेकअप का नहीं…. कुटाई का।

    दसवीं तक आते-आते 3 और लङकियों को मुझ से इश्क हुआ पर एक के हाथ से दो चिमटे खाने के अलावा ज्यादा कुछ नहीं हुआ। फिर एक नई लड़की आई क्लास में और मुझे पहली बार पहली ही नजर में इश्क हो गया।40 लङको में सिर्फ 12 ही लङकियां थी इसलिए कम्पिटीशन तगङा था।

    वैसे तो वो सांवले रंग की साधारण सी दिखती थी पर मुझे उसकी आंखों से पहली ही नजर में इश्क हो गया था।एक दिन वो ओक लगाकर पानी पी रही थी और मैंने उसकी हथेलियों से गिरते पानी से चुल्लू भर कर पी ली।वो भङक गई और बोली कि “चप्पल मारूंगी साले के मुंह पै”!

    मुझे एहसास हुआ कि आज स्पोर्ट्स शूज पहन कर आया हूं और लम्बे फीते जो टखनों पर स्टाइल में बांध रखे हैं उनको खोलने में बहुत टाइम जाएगा।तभी मास्टर जी आ गया और मुझे क्लास में जाना पड़ा।अगले दिन बुखार हो गया दिल टूटने के चक्कर में इसलिए तीन दिन स्कूल नहीं गया।

    मैं 12 किलोमीटर दूर से पढ़ने आता था तो जब स्कूल नहीं आया तो मेरे दोस्त से पूछा उसने। दोस्त ने बताया कि वो तो बस की छत पर से गिरकर मर गया। जब तीन बाद स्कूल पहुंचा और उसकी आंखों में आंसू और चेहरे पर मुस्कान देखी तब मुझे लगा कि मेरी किस्मत बहुत अच्छी है जो उस चप्पल नहीं पहनी थी।

    सारे स्कूल के बच्चे और मास्टर मुझे गांव के नाम से “गावङिया” कहते थे पर सिर्फ वो अकेली थी जो मुझे नाम लेकर बुलाती थी। बहुत स्पेशल फील होता था जब वो “राजेन्द्रिया”कहती थी।अभी दो महीने ही गुजरे थे कि उसका बाप विलेन बनकर आ गया मेरी लव स्टोरी में।

    स्कूल के हालात देखकर उसने उसका वहां से नाम कटवाकर BRJD में दाखिला करवा दिया।मेरी तो दुनिया ही उजङ गई।उस दिन मैंने कसम खाई थी कि वो मुझे अगर दसवीं में छोङकर गई है तो मैं भी दसवीं से बाहर नहीं निकलूंगा। घरवालों और मास्टरों ने पूरी कोशिश कर ली पर मैं तीसरी बार भी फेल हो गया।

    वो बाद में MBBS करके डाक्टर बन गई।पर आज भी आंख बंद करके उसको याद करूं तो उसे हिचकी ना सही ढकार जरूर आएगी। और मेरे कारनामे और शैक्षणिक योग्यता देखते हुए मेरे लिए दुनिया की सिर्फ दो जगह ही बची थी, आईटीआई और आटो मार्केट। पहली जगह के लिए दसवीं पास होना जरूरी था तो और आप्शन नहीं था।

    ये मेरी जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ क्योंकि बचपन से ही चाचा को वर्कशॉप पर काम करते हुए देखता था तो मैं भी सोचता था कि लोग मुझे भी मिस्त्री जी बोले। विडंबना ये थी उस उम्र में लङके स्कूल, कालेज में मस्ती करते थे और मैं ऐसी जगह फंसा जहां लाल कपड़ा भी नहीं दिखता कभी।

    पर मेरा दुर्भाग्य था कि आटो मार्केट के पीछे रहने वाले घर की लड़की से आंखें लङ गई मेरी।चाचा ने वर्कशॉप के ऊपर मकान बना रखा है तो पङोसी होने के नाते सब मुझे भी जानने लगे। लङकी खूबसूरत थी और देखकर हंसती थी,ये मुझे बाद में पता चला कि वो सबको ही देखकर हंसती है।

    महीने बाद एक दिन गली में उसका तब रास्ता रोक लिया जब वो सिलाई सीखने जा रही थी, मैंने कुछ किया नहीं बस कुछ पूछना था पर एक पङोसी ने हमें देख लिया। और लङकी ने डर के मारे अपनी मां को बता दिया।मेरी लव स्टोरी पर तो फिर ग्रहण लग गया जब उसकी मां ने नमक मिर्च लगाकर मेरे चाचा को बताया।

    शाम को चाचा ने सामने बैठाकर थप्पङ मारकर पूछा “आदमी बनेगा या सुभाष फौजी?”उस वक्त फौजी का गैंग मशहूर था। बेइज्जती महसूस हुई थोङी सी पर संतोष इस बात का था कि मारने वाला बंदा घर का ही था। मुझे लगा कि मैंने लङकी के साथ गलत किया और उससे दूर से ही कान पकड़कर माफ़ी मांगना चालू किया।

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    उसने भी कुछ टाइम बाद माफ कर दिया तो दोबारा नैन मटक्का चालू हुआ। मुझे झटका तब लगा जब एक भाभी ने बताया कि कहां आशिकी मार रहा है इसके भाई तेरे हाथ पांव तोड़ने की सोच रहे हैं।वो सच बोली या झूठ पर मैंने सच मान लिया।एक दिन वो अपनी भाभी के साथ पानी लाने निकली तो पीछे आने का इशारा किया।

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    मैं भी दूसरी गली से भागकर गया और जाते ही लङकी को दो रहपटे मार दिए,उसका घङा गिरकर फूट गया। फिर उसकी भाभी ने पता नहीं किस एंगल से निशाना साधकर टोकणी मेरे सिर पर मारी कि दिखना ही बंद हो गया। जब थोङा होश आया तो वहां पर सिर्फ मैं था और सिर पर अमरूद जितना बड़ा गूमङा।

    साली मेरी चप्पल भी सबूत के तौर पर साथ उठा ले गई, मैं लुटा पिटा घर पहुंचा और चाची को सच बता दिया। लोगों पर छेड़छाड़ के केस होते होंगे मुझ पर मारपीट का केस बना। दो घंटे बाद मैं थाणे में था और थाणेदार बार बार मेरे सिर पर हाथ फेरकर गूमङे का साइज़ लेने की कोशिश कर रहा था।

    आखिर में संतुष्ट होकर उसने अपनी डायरी में लिखा”अमरूद जितना बड़ा”! लङकी के चरित्र, घरवालों की पहुंच और मेरे गूमङे के साइज ने केस को तो रफा दफा कर दिया पर मेरे भीतर के इश्क को खत्म कर दिया।आज भी जब उसको मैं दिखता हूं तो अपने पार्लर का शटर गिरा लेती है।

    भगवान ने इमोशन दे दिए पर उनको कैसे व्यक्त करूं ये नहीं बताया मुझे। अगर कोई इंसान अच्छा लगा तो मैं कभी उसके मुंह पर नहीं कह पाया और जरूरी नहीं कि हर इंसान मेरी बाडी लैंग्वेज समझ पाए। मैं भी अच्छा दिखता था और कई पसंद भी करती थी पर उनको दिल टूटने से ज्यादा हड्डियां टूटने का डर था।

     

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